शुक्रवार, 1 फ़रवरी 2008

कहानी मल्लिका की

ये कहानी है मल्लिका की। न..न..न बॉलीवुड सुंदरी मल्लिका की नहीं, गुनाह की मल्लिका की। मल्लिका यानी एक ऐसी औरत जिसके लिए शातिर, बेरहम, बेदर्द और जालिम जैसे शब्द भी हल्के लगते हैं। जुर्म की दुनिया में उसके जैसी दूसरी औरत की मिसाल अब तक नहीं मिली है। बैंगलोर (अब बैंगलुरू) की रहने वाली मल्लिका न कोई वक्त की मारी अबला है और न ही समाज की सताई बेबस औरत, कि जिसे मजबूरी में गुनाह का रास्ता अख्तियार करना पड़ा हो। बल्कि उसे गुनाहगार बनाया दौलत की हवस ने। थोड़े वक्त में ज्यादा दौलत कमाने के लालच ने मल्लिका को कहीं का नहीं छोड़ा।
करीब 12 साल पहले तक मल्लिका एक सीधी-सादी औरत थी। बैंगलोर के कगलीपुरा इलाके में वह अपने पति और बच्चों के साथ खुश थी। पति इतना तो कमा ही लेता था कि पूरे परिवार को दो वक्त की दाल-रोटी आराम से मिल जाती थी। लेकिन मल्लिका ऐशो-आराम की जिंदगी चाहती थी। और इसके लिए जरूरत थी दौलत की। रातों-रात दौलत कमाने के लिए उसने एक चिट फंड कंपनी शुरू कर दी। पति समेत पूरा परिवार इसके खिलाफ था, लेकिन मल्लिका जिद पर अड़ी थी। 1995 से 1998 तक उसने चिटफंड कंपनी चलाई। शुरू में तो सब ठीक-ठाक चला। उसके बाद चिट फंड कंपनी घाटे में आ गई और मल्लिका कर्ज में डूब गई। लोगों का कर्ज चुकाने के लिए मल्लिका अपने ही घर में चोरी करने लगी। बार-बार मना करने पर भी जब वह बाज नहीं आई, तो पति ने उसे घर से निकाल दिया।
उधर, लेनदार अपना पैसा वापस मांग रहे थे। लेकिन मल्लिका के पास उन्हें लौटाने के लिए फूटी कौड़ी भी नहीं थी। तब उसने एक खौफनाक रास्ता अख्तियार किया। रास्ता लूटपाट का। वो खुद एक औरत थी, लिहाजा उसने अपना टारगेट भी औरतों को ही बनाना शुरू कर दिया, उनमें ज्यादातर उम्रदराज औरतें शामिल थीं। वह पूजा-पाठ के बहाने बुजुर्ग औरतों को भरोसे में लेती और फिर मौका मिलते ही सायनाइड खिलाकर उसका काम-तमाम कर देती थी। जी हां, सायनाइड यानी ऐसा खतरनाक जहर, जो इंसान के अंदर जाते ही उसका दम बाहर कर देता है। शातिर मल्लिका जानती थी कि शिकार के जिंदा रहते लूटपाट मुमकिन नहीं, फिर वो गुनाह के बाद कोई सबूत नहीं छोड़ना चाहती थी। इसीलिए पहले वो हत्या करती थी और फिर लूटपाट करके गायब हो जाती थी।
करीब आठ साल पहले 1999 में उसने ममता नाम की एक महिला को अपना पहला शिकार बनाया। मल्लिका ने उसकी हत्या कर दी और उसके गहने बेचकर कुछ लोगों का कर्ज चुका दिया। कत्ल के महीनों बाद भी वो पकड़ी नहीं गई, तो उसका हौंसला बढ़ गया। दो साल बाद उसने पूजा-पाठ के बहाने एक परिवार को अपना निशाना बनाने की कोशिश की, लेकिन इस बार वो पकड़ी गई। मल्लिका को छह महीने की सजा हुई। जेल से छूटने के बाद कुछ दिन उसने घरों में नौकरानी का काम किया। लेकिन पैसों की किल्लत होते ही उसने फिर एक महिला की हत्या कर दी। मल्लिका ने एक के बाद एक करके चार कत्ल किए। लेकिन इस बार एक मोबाइल फोन ने उसे पुलिस के जाल में फंसा दिया। दरअसल एक महिला की हत्या के बाद वो उसका मोबाइल फोन भी अपने साथ ले गई और उसे बेचने के चक्कर में पुलिस की गिरफ्त में आ गई। फिलहाल मल्लिका ने छह औरतों को सायनाइड देकर मारने की बात कबूली है। लेकिन पुलिस को शक है कि यह फेहरिस्त और लंबी हो सकती है।

1 टिप्पणी:

रवीन्द्र रंजन ने कहा…

मल्लिका की कहानी वाकई खौफनाक है। लेकिन आपने यह नहीं बताया कि वह अपने शिकार को अपने जाल में कैसे फंसाती थी। औरतों को लूटने का उसका तरीका क्या था। किस तरह की औरतें उसके निशाने पर होती थीं? साथ में मल्लिका की फोटो भी देते तो हम भी उस खतरनाक औरत के दर्शन कर लेते।